ईरान-इज़राइल तनाव में सोना 1 लाख पार, निवेश का सही समय

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ईरान-इज़राइल तनाव में सोना 1 लाख पार, निवेश का सही समय

मुंबई, भारत –  सोने की चमक आज कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई है, क्योंकि इसकी कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुँच चुकी हैं। इस उछाल की सबसे बड़ी वजह? ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, जिसने दुनिया भर के Investors को Safe-heaven Assets यानी सोने की ओर धकेल दिया है। आज, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर गया, जिससे भारतीय बुलियन मार्केट में एक लहर सी दौड़ गई है।

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने Global Market में अनिश्चितता का एक बड़ा माहौल बना दिया है। जैसे ही इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमले किए – तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे टकराव में यह एक बड़ी एस्केलेशन थी – Investors सोने जैसे पारंपरिक safe heaven में शरण लेने लगे हैं। सुरक्षा की इस मांग में बढ़ोतरी, भारतीय रुपये के कमजोर होने, और यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों ने सोने की कीमतों के लिए एक “परफेक्ट स्टॉर्म” यानी एक तूफानी माहौल बना दिया है।

मुंबई बुलियन मेटल हब LLP के निदेशक मृनेश जैन ने कहा, “ईरान-इज़राइल संघर्ष के कारण सोने की सेफ-हेवन डिमांड, और एक मजबूत यूएस डॉलर के साथ मिलकर भारतीय (MCX) सोने की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर ले गई है।” भारतीय रुपये का कमजोर होना भी घरेलू सोने की कीमतों में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि इससे आयातित सोना और महंगा हो जाता है।

कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव डालने वाला एक और कारक यह है कि यूएस फेडरल रिजर्व जल्द ही ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिसकी उम्मीद साल के अंत तक 50 बेसिस पॉइंट्स तक है। कम ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट को कम करती हैं, जिससे यह निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन जाता है। जब बैंकों में पैसा रखने पर कम रिटर्न मिलता है, तो लोग सोने में इन्वेस्ट करना पसंद करते हैं, जो उन्हें इन्फ्लेशन और मार्केट की अस्थिरता से बचाता है।

प्रमुख भारतीय शहरों में सोने की मौजूदा कीमतें:-

यहां भारत के प्रमुख महानगरों में आज सोने (24 कैरेट, 10 ग्राम) की कीमतों पर एक नज़र है:

  • दिल्ली: लगभग ₹99,463 – ₹1,00,191
  • मुंबई: लगभग ₹99,317 – ₹1,00,561
  • चेन्नई: लगभग ₹99,311 – ₹1,00,490
  • बेंगलुरु: लगभग ₹99,290 – ₹1,00,450
  • कोलकाता: लगभग ₹99,300 – ₹1,00,470

कृपया ध्यान दें: ये कीमतें सांकेतिक हैं और मार्केट डायनामिक्स और स्थानीय टैक्स के आधार पर पूरे दिन बदल सकती हैं। सोने की खरीदारी करते समय हमेशा अपने स्थानीय जौहरी से वर्तमान रेट की पुष्टि करें।

इसका आपके लिए क्या मतलब है?

सोने की कीमतों में यह अभूतपूर्व वृद्धि निवेशकों और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए कई मायने रखती है। आइए, इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं:

निवेशकों के लिए:

यह बढ़ोतरी कई तरह की चुनौतियाँ और अवसर साथ लाती है। जबकि मौजूदा रैली मजबूत फंडामेंटल (भू-राजनीतिक अस्थिरता, सेफ-हेवन डिमांड) से प्रेरित है, ऐसी घटनाओं से जुड़ी वोलैटिलिटी का मतलब है कि सावधानीपूर्वक विचार करना बेहद ज़रूरी है। एक्सपर्ट आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की उम्मीद करते हुए “बाय ऑन डिप्स” स्ट्रैटेजी का सुझाव दे रहे हैं। इसका मतलब है कि जब भी कीमतें थोड़ी गिरें, तो उसे खरीदने का एक अवसर समझना।

  • मौका और खतरा: ऊंची कीमतें बेशक प्रॉफिट का मौका देती हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में वोलेटिलिटी भी बहुत ज़्यादा होती है। छोटी सी खबर भी मार्केट को हिला सकती है। इसलिए, इन्वेस्टर्स को बहुत सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने में एक हिस्सा इन्वेस्ट करना हमेशा फायदेमंद होता है, खासकर ऐसे अनिश्चित समय में। यह आपके पोर्टफोलियो को बैलेंस करने में मदद करता है।
  • डाइवर्सिफिकेशन: सोना हमेशा से पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का एक अहम हिस्सा रहा है। जब शेयर मार्केट में गिरावट आती है या इकोनॉमिक अनसर्टेंटी बढ़ती है, तो सोना अक्सर अच्छा परफॉर्म करता है। इसलिए, मौजूदा हालात में निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो में सोने का एक उचित एलोकेशन बनाए रखना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
  • लंबी अवधि का नज़रिया: सोने को अक्सर लंबी अवधि के इन्वेस्टमेंट के रूप में देखा जाता है। शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी के बावजूद, सोने ने ऐतिहासिक रूप से वेल्थ को संरक्षित किया है और समय के साथ अच्छे रिटर्न दिए हैं। भू-राजनीतिक तनाव और इकोनॉमिक अनिश्चितता के इस दौर में, यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है।

उपभोक्ताओं के लिए:

ऑल-टाइम हाई कीमतें बताती हैं कि सोने की खरीदारी, चाहे वह ज्वेलरी के लिए हो या इन्वेस्टमेंट के लिए, अब काफी महंगी हो जाएगी। यह उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए सोने की खरीदारी की योजना बना रहे थे।

  • ज्वेलरी की खरीदारी: अगर आप ज्वेलरी खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको पहले से कहीं ज़्यादा खर्च करना होगा। मेकिंग चार्जेज और GST के साथ, सोने के गहनों की कीमतें और भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में, लोग हल्के गहनों या गोल्ड प्लेटेड ऑप्शंस की तरफ जा सकते हैं।
  • समझदारी से खरीदारी: सोने की दरों को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों को समझना, जिसमें वैश्विक बाजार के ट्रेंड, स्थानीय मांग, करेंसी एक्सचेंज रेट और सरकारी नीतियां (जैसे मेकिंग चार्जेज पर GST) शामिल हैं, खरीदारी करने से पहले बहुत महत्वपूर्ण है। हमेशा एक प्रतिष्ठित जौहरी से ही खरीदारी करें और बिल्कुल पक्का बिल लें।
  • डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF: अगर आपका मकसद सिर्फ इन्वेस्टमेंट है और आप फिजिकल सोना नहीं चाहते, तो डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) अच्छे ऑप्शंस हो सकते हैं। इनमें आप कम मात्रा में भी इन्वेस्ट कर सकते हैं और फिजिकल गोल्ड को रखने की सुरक्षा की चिंता भी नहीं होती।

सोने का ऐतिहासिक महत्व, संकट में ‘सेफ हेवन’ क्यों?

 

सोने को हजारों सालों से धन और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता रहा है। जब भी दुनिया में कोई बड़ा संकट आता है, चाहे वह युद्ध हो, आर्थिक मंदी हो या महामारी, लोग हमेशा सोने की तरफ रुख करते हैं। ऐसा क्यों?

  1. टिकाऊपन और सीमित आपूर्ति: सोना एक फिजिकल कमोडिटी है जिसकी आपूर्ति सीमित है। इसे न तो आसानी से बनाया जा सकता है और न ही यह समय के साथ खराब होता है। यही इसकी अंतर्निहित वैल्यू का आधार है।
  2. करेंसी का विकल्प: जब करेंसी पर से विश्वास उठने लगता है या महंगाई बहुत बढ़ जाती है, तो सोना एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में काम करता है। कई सेंट्रल बैंक भी अपनी रिजर्व करेंसी के हिस्से के रूप में सोना रखते हैं।
  3. यूनिवर्सल मान्यता: दुनिया के हर कोने में सोने को मूल्यवान माना जाता है। इसकी यूनिवर्सल एक्सेप्टेबिलिटी इसे संकट के समय में एक आसान लिक्विडिटी का स्रोत बनाती है।

मौजूदा भू-राजनीतिक क्लाइमेट सोने की अनिश्चितता के खिलाफ एक हेड के रूप में अपनी स्थायी भूमिका को रेखांकित करता है। ईरान और इज़राइल के बीच स्थिति जैसे-जैसे आगे बढ़ती रहेगी, यह पीली धातु सुर्खियों में रहने की संभावना है, इसकी कीमत वैश्विक परिदृश्य की चिंताओं और बदलती गतिशीलता को दर्शाती रहेगी।

 क्या और बढ़ेगी सोने की चमक?

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव बना रहेगा और ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता का माहौल रहेगा, सोने की कीमतों में तेज़ी जारी रह सकती है। यूएस फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं भी सोने के लिए एक पॉजिटिव फैक्टर हैं। हालांकि, निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि मार्केट वोलेटाइल है और अचानक कोई पॉजिटिव डेवलपमेंट भी कीमतों को नीचे ला सकता है।

सोने के इन्वेस्टमेंट के लिए, कई एक्सपर्ट्स इसे एक स्ट्रैटेजिक एसेट के रूप में देखने की सलाह देते हैं, न कि शॉर्ट-टर्म गेन के लिए। यह आपके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने और मार्केट की अस्थिरता से बचाने का एक अच्छा तरीका है।

सोना हमेशा से धन, सुरक्षा और स्थिरता का प्रतीक रहा है। मौजूदा समय में ईरान-इज़राइल के बीच बढ़ता तनाव, भारतीय रुपये का कमजोर होना और वैश्विक ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें, ये सभी कारक सोने की कीमतों को रिकॉर्ड-हाई पर ले गए हैं। यह स्थिति निवेशकों के लिए अवसर और चुनौतियां दोनों पेश करती है, जबकि उपभोक्ताओं के लिए सोने की खरीदारी को महंगा बनाती है।

याद रखें, निवेश हमेशा सोच-समझकर और रिसर्च के बाद ही करना चाहिए। सोने का वर्तमान रैली हमें इसकी अटल भूमिका की याद दिलाता है कि कैसे यह अनिश्चितता के समय में एक विश्वसनीय सहारा बना रहता है। जैसे-जैसे दुनिया बदल रही है, सोने की चमक शायद और भी तेज़ होती जाएगी।

क्या आप इस गोल्डन रैली में शामिल होने की सोच रहे हैं, या मार्केट को शांत होने का इंतजार करेंगे? हमें अपने विचार बताएं!

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